चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम के इंफोर्समेंट विंग में पैसों की अवैध वसूली का खुलासा विजिलेंस जांच में हुआ है। पहले पता चला था कि रेहड़ी-फड़ी लगवाने या कार्रवाई से बचने के लिए कर्मचारी पैसे वसूलते थे, लेकिन अब यह भी सामने आया कि जब्त सामान को बिना चालान किए ही मालिकों को पैसे लेकर वापस कर दिया जाता था। सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों ने मालखाने तक सामान ले जाने के बजाय रास्ते में ही मालिकों को संदेश भेजकर कहा कि “सामान वापस चाहिए तो पैसे तय जगह पर दो।” रकम मिलने पर सामान वहीं छोड़ दिया जाता था।
विजिलेंस अब मालखाने के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि पता चल सके कि दिन में कितनी बार सामान लाया गया और कितनी बार रास्ते में सौदा निपटाया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कितने चालान काटे गए और कितनी बार बिना चालान सामान लौटाया गया। साथ ही, यह भी सामने आ सकता है कि रास्ते में किन जगहों पर सौदेबाजी होती थी।
जांच का एक अहम पहलू यह है कि सब इंस्पेक्टर, बेलदार और अन्य कर्मचारियों के बैंक खाते और मोबाइल कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि किसने कब पैसे ट्रांसफर किए और हर महीने कितनी रकम जमा होती रही। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि इन कर्मचारियों की ड्यूटी कौन तय करता था।
विजिलेंस ने पहले ही कई सब इंस्पेक्टरों से पूछताछ की है और सोमवार को भी कई कर्मचारियों को बुलाया गया है। जांच का नेतृत्व डीएसपी वेंकटेस कर रहे हैं। यह जांच सीवीओ (चीफ विजिलेंस ऑफिसर) की मंजूरी मिलने के बाद औपचारिक रूप से शुरू हुई थी। पूर्व कर्मचारी विकास की शिकायत पर ही यह कार्रवाई शुरू हुई, और अब उनकी पूछताछ भी हो सकती है।