चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के बहुचर्चित सिप्पी सिद्धू हत्याकांड में अब पुलिस कार्रवाई ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है। उन पर आरोप है कि शुरुआती जांच के दौरान उन्होंने गंभीर लापरवाही बरती और अहम सबूतों को नष्ट कर दिया। साल 2015 में जब सिप्पी की गोली मारकर हत्या हुई थी, तब दिलावरी सेक्टर-26 थाने की प्रभारी थीं।
सिप्पी के परिवार की शिकायत पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी मां दीपिंदर कौर और भाई जसमनप्रीत सिंह उर्फ जिप्पी को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। दोनों से 23 अगस्त को पूछताछ की जाएगी। परिवार का कहना है कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और जानबूझकर की गई गड़बड़ी से केस काफी कमजोर पड़ गया।
सीबीआई की दिसंबर 2020 की रिपोर्ट ने भी इसी दिशा में इशारा किया था। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि प्रारंभिक जांच में की गई चूक ने पूरे मामले को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसी आधार पर सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस को पूनम दिलावरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की सलाह दी थी। परिवार ने इससे पहले भी आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी।
इस केस में 2022 में सीबीआई ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की बेटी कल्याणी सिंह को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के मुताबिक, सिप्पी की हत्या उसी ने की थी, जिसने उसे सेक्टर-27 के पार्क में बुलाकर गोलियों से मौत के घाट उतार दिया। वर्तमान में कल्याणी जमानत पर बाहर है और अदालत में मुकदमे का सामना कर रही है।