चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ पीजीआई ने डायलिसिस मरीजों के लिए नई तकनीक शुरू की है, जिसकी लागत अब सिर्फ 5 हजार रुपए है। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल के मुताबिक, यह तकनीक विशेष रूप से संसाधन-सीमित क्षेत्रों में बड़ी राहत साबित होगी।
नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने इसे “गेम-चेंजर” बताया और कहा कि इससे हाई-फ्लो एवी फिस्टुला जैसी गंभीर समस्याओं का इलाज आसान हो गया है। पहले इस प्रक्रिया के लिए एंजियोग्राफी, महंगे कैथेटराइजेशन लैब और अस्पताल में भर्ती की जरूरत होती थी, जिसकी लागत लगभग 50 हजार रुपए तक होती थी।
नई तकनीक में फिस्टुला पर हल्का कसाव (बैंडिंग) लगाया जाता है, जिससे ब्लड फ्लो नियंत्रित होता है और दिल पर दबाव कम होता है। यह डे-केयर प्रक्रिया है, ज्यादातर मामलों में एनेस्थीसिया की भी जरूरत नहीं पड़ती और मरीज कुछ ही घंटों में घर लौट सकता है। प्रो. मनीष राठी और डॉ. अजय सालवानिया ने इसे विकसित किया है।
पीजीआई पिछले तीन सालों में इस तकनीक से सबसे ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुका है और दुनिया में सबसे बड़े अनुभव का मालिक है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे सराहा गया और दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में इस पर पेश किए गए पेपर को बेस्ट पेपर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।