चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने 7 साल पुराने एक दर्दनाक सड़क हादसे पर बड़ा फैसला सुनाते हुए दो मृतक युवकों के परिवारों को कुल 66.86 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। यह भीषण दुर्घटना साल 2019 में पंजाब के पटियाला के पास हुई थी, जहां एक ओवरलोड ट्रक की लापरवाही के चलते कार सवार दो दोस्तों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
इस संवेदनशील मामले की लंबी सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी (प्रिजाइडिंग ऑफिसर) अमित कुमार ग्रोवर ने माना कि दुर्घटना पूरी तरह से ट्रक चालक की तेज रफ्तार और घोर लापरवाही का नतीजा थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक गुरप्रीत सिंह के आश्रितों को 18.24 लाख रुपये और दूसरे मृतक अवतार सिंह के परिवार को 48.62 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है। पीड़ितों ने ट्रक मालिक अशोक कुमार मौदगिल, ड्राइवर अमरीक सिंह और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पक्षकार बनाते हुए चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी।
यह दुखद घटना 29 सितंबर 2019 की रात करीब 10:30 बजे पटियाला के रेडिएंट टेक्सटाइल के पास घटित हुई थी। याचिका के विवरण के मुताबिक, गुरप्रीत सिंह अपनी वर्ना कार से अवतार सिंह और सरबजीत सिंह के साथ जा रहे थे, तभी उनकी कार के आगे चल रहे एक ओवरलोडेड ट्रक ने अचानक बिना कोई इंडिकेटर या संकेत दिए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। ट्रक में क्षमता से अधिक भूसा भरा हुआ था जो दोनों तरफ करीब 5-5 फीट बाहर निकला हुआ था, साथ ही ट्रक पर न तो कोई रिफ्लेक्टर था और न ही उसकी टेल लाइट जल रही थी, जिसके कारण पीछे से आ रही कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी।
इस भयावह टक्कर में गुरप्रीत सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि अस्पताल में इलाज के दौरान अवतार सिंह ने भी दम तोड़ दिया। हादसे के बाद पंजाब के समाना थाने में आरोपी ट्रक चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ट्रिब्यूनल ने चश्मदीद बलजिंदर सिंह की गवाही और पुलिस रिकॉर्ड्स के आधार पर फैसला सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए साफ किया कि क्योंकि चालक के पास वैध लाइसेंस था, इसलिए इंश्योरेंस कंपनी पीड़ितों को मुआवजा देने की अपनी वित्तीय जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।