चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड और गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने सरस्वती नदी के पुनरुद्धार और जागरूकता के लिए हाथ मिला लिया है। सोमवार को पंचकूला स्थित बोर्ड कार्यालय में हुए इस एमओयू पर हस्ताक्षर के साथ ही सरस्वती के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को अकादमिक विमर्श का हिस्सा बनाने की पहल शुरू हो गई है। बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह ने इस मौके पर सरस्वती पुनरुद्धार कार्यों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया।
बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीण ने बताया कि विश्वविद्यालय में ‘सरस्वती लाइब्रेरी’ स्थापित की जाएगी। यहां शोध को बढ़ावा देने के साथ ही सरस्वती पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे, जिससे छात्रों को इस प्राचीन नदी के बारे में गहराई से अध्ययन का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल सिर्फ शोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी।
गुरुग्राम विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश योगी ने बताया कि छात्र सरस्वती पर डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म, न्यूज लेटर आदि बनाएंगे, जिससे यह विषय और भी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने इस सहयोग को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताया और इसे एक ऐतिहासिक कदम करार दिया।
समारोह में विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. संजय कौशिक, प्रो. राकेश योगी और प्रो. मीनाक्षी श्योराण मौजूद थे, जबकि बोर्ड की ओर से उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच, सीईओ कुमार सुप्रवीण और डॉ. दीपा ने भाग लिया। सभी ने विश्वास जताया कि यह साझेदारी सरस्वती नदी के संरक्षण और अध्ययन में एक मील का पत्थर साबित होगी।