चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमडी-एमएस में दाखिले के लिए एससी आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने कहा है कि चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच), सेक्टर-32 में दाखिले के दौरान ऐसी शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं, जिनका जिक्र प्रॉस्पेक्टस में नहीं किया गया है। यानी संस्थान बाद में कोई नया नियम बनाकर उम्मीदवारों की पात्रता सीमित नहीं कर सकता।
जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस राजेश गौर की खंडपीठ ने रुद्रांश कालेर और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने एमडी-एमएस सत्र 2026 के दाखिले के लिए जारी प्रॉस्पेक्टस में एससी आरक्षण का लाभ केवल चंडीगढ़ प्रशासन से जारी बोनाफाइड एससी प्रमाणपत्र रखने वालों तक सीमित करने के नियम को चुनौती दी थी। उन्होंने चंडीगढ़ में 1 नवंबर 1966 से रहने की शर्त पर भी आपत्ति जताई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे चंडीगढ़ के निवासी हैं और यहां अधिसूचित अनुसूचित जातियों से आते हैं। उनके पास सक्षम अधिकारी की ओर से जारी जाति प्रमाणपत्र हैं। उन्होंने जीएमसीएच चंडीगढ़ से ही एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है और नीट पीजी-2022 परीक्षा एससी श्रेणी में पास की है। इसके बावजूद दाखिले के दौरान ऐसी शर्तें लगाई जा रही हैं, जिनसे उनकी पात्रता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत एससी का दर्जा और आरक्षण का लाभ संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश तक सीमित रहता है।
प्रॉस्पेक्टस में नहीं थी 1966 से रहने की शर्त
हाईकोर्ट ने दाखिले के नियमों की जांच के बाद पाया कि प्रॉस्पेक्टस में कहीं भी यह नहीं लिखा था कि उम्मीदवार के पिता या पूर्वज 1 नवंबर 1966 से पहले चंडीगढ़ में रह रहे हों। कोर्ट ने कहा कि सरकारी निर्देशों के आधार पर दाखिले के लिए ऐसी नई शर्त नहीं जोड़ी जा सकती, जिसका उल्लेख पहले से जारी प्रॉस्पेक्टस में नहीं है। दाखिले की पात्रता और मेरिट तय करने का आधार प्रॉस्पेक्टस में दिए गए नियम ही होंगे।
एससी उम्मीदवारों की मेरिट सूची बनाने का आदेश
खंडपीठ ने जीएमसीएच और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि एमडी-एमएस सत्र 2026 के लिए एससी श्रेणी की मेरिट सूची प्रॉस्पेक्टस में तय नियमों के मुताबिक तैयार कर जारी की जाए। साथ ही आरक्षण का दावा करने वाले याचिकाकर्ताओं और अन्य उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों की भी निर्धारित नियमों के तहत जांच की जाए और उनकी मेरिट तय की जाए। कोर्ट ने साफ किया कि उसने किसी खास उम्मीदवार की पात्रता पर फैसला नहीं दिया है, बल्कि सभी पर समान नियम लागू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका और इससे जुड़ी अन्य लंबित अर्जियों का निपटारा कर दिया।