चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल 2026 में ही डॉग बाइट के 3,858 मामले सामने आए, जिनमें 2,661 मामले स्ट्रे डॉग्स से जुड़े थे। इनमें से 1,288 मामले गंभीर कैटेगरी-III बाइट के बताए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जमीन पर कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को “खतरनाक” आवारा कुत्तों की पहचान और उन्हें अलग रखने का आदेश दिया था, लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम अब तक इलाकेवार सर्वे नहीं कर पाया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पहचान केवल शिकायतों के आधार पर की जा रही है। निगम के मुताबिक किसी कुत्ते को खतरनाक घोषित करने के लिए पशु विशेषज्ञों की औपचारिक जांच जरूरी होती है।
आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 279 शिकायतें मिलीं, जिनमें 59 डॉग बाइट केस थे। फरवरी में शिकायतें बढ़कर 301 पहुंच गईं, जबकि मार्च में 237 और अप्रैल में 205 शिकायतें दर्ज की गईं। कई शिकायतों को SPCA के पास भेजा गया। शहर के लोग लगातार डर और असुरक्षा की बात कर रहे हैं। सेक्टर-38 की नेहा गुप्ता ने कहा कि बच्चे अकेले बाहर निकलने से डरते हैं, जबकि सेक्टर-21 के राकेश शर्मा ने बताया कि मॉर्निंग वॉक के दौरान आवारा कुत्ते अक्सर पीछा करते हैं।
नगर निगम ने दादूमाजरा में 1,980 कुत्तों की क्षमता वाला नया डॉग शेल्टर बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें अलग केनेल, वेटरनरी क्लिनिक, किचन और एक्सरसाइज एरिया जैसी सुविधाएं होंगी। निगम का कहना है कि UT प्रशासन से नक्शे की मंजूरी मिलने के बाद यह शेल्टर साल के अंत तक चालू किया जा सकता है।