चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में किए गए एक हालिया अध्ययन ने नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे मरीजों के बीच प्रेगाबालिन (Pregabalin) दवा के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। यह दवा मुख्य रूप से नसों के दर्द, मिर्गी और घबराहट के इलाज के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है। शोध में पाया गया कि नशा छुड़ाने के केंद्रों में इलाज करा रहे लगभग 44.6% मरीज इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना कर रहे हैं, जबकि लगभग 25% मरीज पूरी तरह से इस पर निर्भर हो चुके हैं।
अध्ययन में शामिल ज्यादातर लोग पुरुष थे जिनकी औसत उम्र करीब 34 साल पाई गई। इनमें से अधिकांश लोग पहले से ही अफीम, चिट्टा या शराब के नशे के आदी थे। मरीजों ने बताया कि वे इस दवा का उपयोग मानसिक शांति, दर्द से राहत, नींद लाने या फिर दूसरे नशों का असर बढ़ाने के लिए करते हैं। कई मामलों में तो जब मरीजों को हेरोइन (चिट्टा) नहीं मिलता या पैसे की कमी होती है, तब वे विकल्प के तौर पर प्रेगाबालिन का सहारा लेते हैं।
दवा की उपलब्धता को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। करीब 73% लोगों ने बताया कि वे मेडिकल स्टोर से बिना किसी वैध पर्चे के आसानी से यह दवा खरीद लेते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मरीज रोजाना 300 मिलीग्राम से लेकर 2,400 मिलीग्राम तक की भारी खुराक ले रहे हैं। इस दवा के दुरुपयोग के कारण 7.8% मरीजों में मिर्गी के दौरे जैसे खतरनाक लक्षण भी देखे गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पंजाब और आसपास के इलाकों में नशे की एक नई और उभरती हुई समस्या है। डॉक्टरों और सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है ताकि मेडिकल स्टोर से इस दवा की अवैध बिक्री को रोका जा सके। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की जांच के लिए नए तरीके अपनाए जाने चाहिए और इस दवा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नीति बनानी चाहिए।