चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में 'असम टेनेंसी एक्ट, 2021' (Assam Tenancy Act) को लागू किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (DBA) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद 13 मई तक कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के कारण चंडीगढ़ जिला अदालत में शनिवार को होने वाली 'नेशनल लोक अदालत' का भी बहिष्कार किया जाएगा।
बार एसोसिएशन की जनरल हाउस मीटिंग में इस नए कानून के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक चौहान ने बताया कि नए अधिनियम को चुनौती देने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की जाएगी, जिसके लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
हड़ताल के दौरान कड़े नियम:
लोक अदालत का बहिष्कार: शनिवार को निर्धारित नेशनल लोक अदालत में कोई भी वकील शामिल नहीं होगा।
ट्रैफिक चालान और अन्य मामले: हड़ताल की अवधि के दौरान ट्रैफिक चालान सहित किसी भी मामले की सुनवाई या पैरवी नहीं की जाएगी।
शपथ आयुक्त और नोटरी: नोटरी और ओथ कमिश्नर को भी काम बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जुर्माने का प्रावधान: यदि कोई वकील या उनका इंटर्न इस दौरान अदालत में पेश होता है, तो उन पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अन्य नियमों के उल्लंघन पर भी दंड की व्यवस्था की गई है।
DBA के उपाध्यक्ष संदीप गुर्जर ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन नए कानून के प्रावधानों के खिलाफ है, जिसे वे वकीलों और आम जनता के हितों के विपरीत मान रहे हैं। आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए 13 मई को सुबह 11 बजे दोबारा बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद ही काम पर लौटने या हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया जाएगा।