चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत चंडीगढ़ में सात साल में 31 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, लेकिन हवा की हालत में जरा भी सुधार नहीं हुआ। आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 से 2024-25 तक पीएम10 का स्तर लगातार 114 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बना रहा। यानी करोड़ों की लागत के बावजूद नतीजा ‘शून्य’ रहा।
सरकार ने संसद में बताया कि देश के 130 शहरों में से 103 शहरों ने वायु गुणवत्ता में सुधार दिखाया, लेकिन चंडीगढ़ इस मामले में फिसड्डी साबित हुआ। मुंबई, कोलकाता और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी प्रदूषण घटा है, लेकिन चंडीगढ़ में तस्वीर जस की तस बनी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ते वाहन, धूल उड़ाती निर्माण साइट्स, कचरे का खुले में जलना और कमजोर अपशिष्ट प्रबंधन इसके पीछे अहम वजह हैं। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी और जनता में जागरूकता की कमी भी बड़ा कारण मानी जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि चंडीगढ़ का प्रदूषण स्तर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों से भी ज्यादा है। सिर्फ दिल्ली और लुधियाना ही इससे आगे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी नतीजे क्यों नहीं दिख रहे।