चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव ने निजी स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा और पार्किंग नियमों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने 'सेफ ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी फॉर स्टूडेंट्स' (STRAPS) के उल्लंघन और स्कूलों के भीतर पार्किंग स्पेस के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। स्कूलों को अपनी पार्किंग व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाने के लिए एक महीने का समय दिया गया है, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि कई स्कूलों ने बिना मंजूरी के अपने बिल्डिंग प्लान में बदलाव कर दिए हैं। नक्शे में पार्किंग के लिए तय की गई जगहों को क्लासरूम, खेल के मैदान या कोर्ट में बदल दिया गया है। इस वजह से स्कूलों के अंदर जगह की भारी कमी हो गई है और बच्चों को स्कूल परिसर के भीतर बसों में चढ़ाने या उतारने में दिक्कत आ रही है।
परिसर के अंदर जगह न होने के कारण माता-पिता और बस चालकों को मुख्य सड़कों पर बच्चों को छोड़ना पड़ता है, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम होता है बल्कि छात्रों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन स्कूलों के पास अंदर पार्किंग की जगह है, वे हर हाल में बच्चों को कैंपस के भीतर ही पिक-अप और ड्रॉप करेंगे। जहाँ यह संभव नहीं है, वहां स्कूल को बाहर सुरक्षित ज़ोन बनाने होंगे और अपने कर्मचारी तैनात कर ट्रैफिक संभालना होगा।
सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन ने निजी स्कूलों द्वारा ईडब्ल्यूएस (EWS) कोटे के पालन पर भी नजर टेढ़ी की है। लीज की शर्तों के अनुसार, कई निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 15% सीटें मुफ्त रखनी अनिवार्य हैं। एस्टेट ऑफिस को इन शर्तों के पालन की जांच करने और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जरूरतमंद बच्चों को उनका हक मिल रहा है।