चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि पिछले पांच वर्षों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) डेटा रिकॉर्ड पर पेश किया जाए, ताकि प्रदूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में बताया कि योजनाबद्ध शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ की हवा लगातार खराब होती जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को तय की गई है।
याचिका में यह भी सामने आया कि सर्दियों के दौरान AQI बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। दिसंबर 2025 में यह 353 से 438 के बीच दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस स्तर का प्रदूषण लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
प्रदूषण के कारणों में निर्माण कार्य की धूल, वाहनों का धुआं, कचरा जलाना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण शामिल हैं। अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली एक ही हवा साझा करते हैं, लेकिन नियंत्रण अलग-अलग होने से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। कोर्ट ने अब हर महीने के सबसे खराब AQI आंकड़े पेश करने को कहा है, ताकि समस्या की गंभीरता का सही आकलन किया जा सके।