चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में जांच के दौरान लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पुलिस रिमांड के दौरान बड़ा दावा किया है कि ऑडिटरों को मैनेज करने के लिए उनके घरों पर सोलर पैनल तक लगवाए गए थे। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले की जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
पुलिस ने इस केस में रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान को जिला अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने सात दिन की बजाय चार दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया। अब पुलिस इन आरोपियों को सुखविंदर अबरोल के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि ऑडिट के दौरान गड़बड़ियों को छिपाने के लिए कथित तौर पर ऑडिटरों को “खुश” रखने की रणनीति अपनाई गई। आरोप है कि हर तीन महीने में होने वाले बैंक ऑडिट में आने वाले ऑडिटर्स के लिए यह व्यवस्था की जाती थी, जिसमें उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाने जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं। इस काम के लिए कथित तौर पर बैंक मैनेजर ने अपने सेविंग अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खाते में भेजी थी।
मामले में एक और बड़ा खुलासा 4.98 करोड़ रुपये की संदिग्ध पेमेंट को लेकर हुआ है, जो 1 सितंबर 2025 को सनलिव सोलर कंपनी के खाते में नगर निगम के खाते से की गई थी। इस भुगतान को सीमा धीमान ने अप्रूव किया था, जबकि बैंक स्तर पर भी इसकी मंजूरी दी गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 116.84 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट का रिकॉर्ड बैंक सिस्टम में नहीं पाया गया, जिससे फर्जी एफडीआर के बड़े खेल की आशंका गहराई है। इसके अलावा 8.22 करोड़ रुपये से अधिक की तीन संदिग्ध एंट्रियां भी मिली हैं, जो नगर निगम के रिकॉर्ड से मेल नहीं खातीं।
पुलिस अब उन सिस्टम्स और डिजिटल रिकॉर्ड्स की तलाश कर रही है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी एफडीआर तैयार करने और वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम देने में किया गया।
इस मामले में नगर निगम का अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा भी जांच के घेरे में है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है और उसने अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने में उसकी भूमिका का भी जिक्र किया है, जिससे जांच और तेज कर दी गई है।