चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: हिमाचल प्रदेश की शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रोहडू क्षेत्र में सक्रिय एक सुव्यवस्थित ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन की सफलता पुलिस की उस सूक्ष्म जांच का परिणाम है, जो महज 9 ग्राम हेरोइन की बरामदगी से शुरू हुई थी। पुलिस ने न केवल स्थानीय स्तर पर नशे की सप्लाई करने वाले युवक को पकड़ा, बल्कि तकनीकी साक्ष्यों का पीछा करते हुए इस पूरे काले कारोबार के मास्टरमाइंड तक पहुँचने में कामयाबी हासिल की।
मामले की कड़ियाँ 15 मार्च 2026 को तब जुड़नी शुरू हुईं जब रोहडू पुलिस ने सार्थक नामक एक युवक को गिरफ्तार किया। शुरू में यह मामला नशे की एक छोटी खेप का लग रहा था, लेकिन जांच अधिकारियों ने आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंक लेनदेन को खंगालना शुरू किया। इस गहन विश्लेषण से यह खुलासा हुआ कि रोहडू और आसपास के इलाकों में चिट्टे की सप्लाई किसी स्थानीय गिरोह द्वारा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ से संचालित एक बड़े नेटवर्क द्वारा की जा रही थी।
जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर अमित गुप्ता का नाम सामने आया, जो बाराबंकी का रहने वाला है और लखनऊ में बैठकर इस तस्करी को अंजाम दे रहा था। अमित ने पुलिस से बचने के लिए 'लोकेशन बेस्ड डिलीवरी' का एक शातिर तरीका अपनाया था, जिसके तहत वह सीधे ग्राहकों से मिलने के बजाय गुप्त स्थानों पर माल छोड़ देता था। जब पुलिस की टीम उसे पकड़ने लखनऊ पहुंची, तो वह वहां से चकमा देकर फरार हो गया, जिससे पुलिस को अपने ऑपरेशन्स और तेज करने पड़े।
अंततः, शिमला पुलिस की निरंतर निगरानी और तकनीकी सर्विलांस ने अमित गुप्ता को 11 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ में ट्रैक कर लिया, जहाँ से उसे दबोच लिया गया। वर्तमान में मुख्य आरोपी 14 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर है और उससे इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों और वित्तीय स्रोतों के बारे में पूछताछ की जा रही है। यह गिरफ्तारी हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से हो रही ड्रग्स की घुसपैठ को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है।